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प्रकृति दुआ शाम से गुपचुप बातें माँ लेकिन तू चाय के साथ वाली नमकिन नही... हो सके तोह दूर ही रहना मनुष्य मनवणे खूबसूरत शाम भूत इंतजार स्त्री विमर्श भूख लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा तक इन दिखावे वालें अपनों से... यादोमें तोह हम हमेशा ही साथ रहेंगे से चाय अदरक वाली मुस्कान सूक्ष्म

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