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लेकिन तू चाय के साथ वाली नमकिन नही... हो सके तोह दूर ही रहना तक किसका माँ इंतजार सूक्ष्म भूत चाय अदरक वाली दुआ मनुष्य लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा शाम से गुपचुप बातें इस ख्वाबो वाली सपनों से... हमेशा जरा बचके ही रहना पगली यादोमें तोह हम हमेशा ही साथ रहेंगे इन दिखावे वालें अपनों से... प्रकृति पहाड़ मनवणे से स्त्री विमर्श

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